Most Touching Lines by a boy whoz beloved was marrying sum1 else...
"Aaj dulhan ke laal jode me use uski saheliyon ne sajaya hoga,,,
meri jaan ke gore haathon ko mehandi se sajaya hoga...
bahut gehra chadha hoga mehndi ka rang,,,
...us mehndi me usne mera naam chhupaya hoga....
rah rah ke ro padi hogi,,,jb usko mera khayal aaya hoga....
khud ko dekha hoga jab aaine me to chehra mera bhi nazar aaya hoga...
bahut pyaari lag rahi hogi wo,,..aaj..
dekh kr usko chand bhi sharmaya hoga...
aaj meri jaan ne apne maa baap ki izzat ko bachaya hoga...
usne beti hone ka har farz nibhaya hoga. . . .
sochta hu kis tarah usne khud ko samjhaya hoga...
apne hathon se hamare khaton ko jalaya hoga...
khud ko mazbut banaakar meri yado ko mitaya hoga...
bhukhi hogi wo jaanta hu main,,mere bina usne kuch na khaya hoga..
aaj usne sab kuch peechay chhor ke kisi anjaan ko ,
apni zindagi ka humsafar banaya hoga.....
Monday, September 19
Thursday, September 15
करिश्माई व्यक्तित्व वाले जॉब्स
जब स्टीव जॉब्स ने अपनी कॉलेज की पढ़ाई बीच में छोड़ी थी तो शायद ही किसी को कोई फर्क पड़ा हो लेकिन अब जब उन्होंने एप्पल के सीईओ पद को छोड़ा है तो सारी दुनिया हिल गई है और बाजार में भूकंप सा आ गया है।
केवल एक सेमेस्टर के बाद पढ़ाई छोड़ देने वाले स्टीव को प्रतिभा का धनी छात्र माना जाता था। स्टीव ७० के दशक में पढ़ाई करने के बजाय अध्यात्म की तलाश में भारत आ गए और जब वे अमेरिका वापस लौटे तो बौद्ध बन चुके थे हालांकि उनके पिता एक सीरियाई मुसलमान थे।
लगभग चार साल के कम समय में ही आईपैड और आईफोन से दुनिया में छा जाने वाले एप्पल का दिल, दिमाग और आत्मा जॉब्स को ही माना जाता है। दुनिया के दूसरे सीईओ की तरह टाई और कोर्ट के बजाय वे पूरी बांह की काली टी शर्ट और जींस पहनना पसंद करते हैं। जॉब्स ने १९७६ में अपने कुछ दोस्तों के साथ मिलकर एप्पल कम्प्यूटर को शुरू किया था।
अथक मेहनत से कंपनी तो जम गई लेकिन हालात कुछ ऐसे बने कि जॉब्स का कंपनी के साथ बने रहना मुश्किल हो गया और अंतत: १९८५ में उन्हें एप्पल कम्प्यूटर को छोड़ देना पड़ा। लेकिन उनका जाना कंपनी के लिए नुकसान दायक सिद्ध हुआ और जितनी तरक्की कंपनी ने उनके नेतृत्व में की जॉब्स के बाद वह तरक्की थमने लगी।
इसी बीच माइक्रोसॉफ्ट को टक्कर देने के लिए एप्पल को जॉब्स की जरूरत महसूस हुई और उन्हें १२ साल बाद एक बार फिर से १९९७ में एप्पल में वापस बुला लिया गया। उनके नेतृत्व में कंपनी ने एक बार फिर रफ्तार पकड़ी और बाजार में मैकबुक और मैक पीसी नाम के उत्पाद उतारे। इन उत्पादों के बाद कंपनी की प्रसिद्धि और बाजार दोनों में ही काफी इजाफा हुआ।
अपनी दूसरी पारी की शुरू करने के १० बाद जॉब्स को उस समय भारी सफलता मिली जब एप्पल ने आईफोन का निर्माण कर दिया। इसके बाद तो जॉब्स और कंपनी के रूतबे में अचानक से ही बहुत बढ़ोतरी हुई। कुछ लोगों ने तो आईफोन के निर्माण को तकनीकी क्रांति की संज्ञा दे दी और यह बात कुछ हद तक सही भी थी क्योंकि केवल बात और मैसेज तक सीमित रहने वाला मोबाइल फोन एक चलता-फिरता कम्प्यूटर जो बन गया था
लेकिन तकनीकी क्षेत्र का यह व्यक्ति अपने स्वास्थ्य से हार गया। लीवर और कैंसर से ग्रसित होने के बाद जॉब्स ने कंपनी के सीईओ पद से इस्तीफा दे दिया। जॉब्स अपने कार्यकाल के दौरान कंपनी से वेतन के रूप में केवल एक डॉलर की राशि लेते रहे हैं, हालांकि उनके समस्त खर्चे कंपनी ही उठाती रही है।
बीमारी का असर उनके व्यक्तित्व पर भी पड़ा और वे एक जिद्दी नेता बन गए जो हर हाल में अपने एजेंडे को पूरा करना चाहता है। इसे उनकी मेहनत का ही परिणाम कहा जा सकता है कि आज एप्पल दुनिया का सबसे ब्रांड बन गया है।
केवल एक सेमेस्टर के बाद पढ़ाई छोड़ देने वाले स्टीव को प्रतिभा का धनी छात्र माना जाता था। स्टीव ७० के दशक में पढ़ाई करने के बजाय अध्यात्म की तलाश में भारत आ गए और जब वे अमेरिका वापस लौटे तो बौद्ध बन चुके थे हालांकि उनके पिता एक सीरियाई मुसलमान थे।
लगभग चार साल के कम समय में ही आईपैड और आईफोन से दुनिया में छा जाने वाले एप्पल का दिल, दिमाग और आत्मा जॉब्स को ही माना जाता है। दुनिया के दूसरे सीईओ की तरह टाई और कोर्ट के बजाय वे पूरी बांह की काली टी शर्ट और जींस पहनना पसंद करते हैं। जॉब्स ने १९७६ में अपने कुछ दोस्तों के साथ मिलकर एप्पल कम्प्यूटर को शुरू किया था।
अथक मेहनत से कंपनी तो जम गई लेकिन हालात कुछ ऐसे बने कि जॉब्स का कंपनी के साथ बने रहना मुश्किल हो गया और अंतत: १९८५ में उन्हें एप्पल कम्प्यूटर को छोड़ देना पड़ा। लेकिन उनका जाना कंपनी के लिए नुकसान दायक सिद्ध हुआ और जितनी तरक्की कंपनी ने उनके नेतृत्व में की जॉब्स के बाद वह तरक्की थमने लगी।
इसी बीच माइक्रोसॉफ्ट को टक्कर देने के लिए एप्पल को जॉब्स की जरूरत महसूस हुई और उन्हें १२ साल बाद एक बार फिर से १९९७ में एप्पल में वापस बुला लिया गया। उनके नेतृत्व में कंपनी ने एक बार फिर रफ्तार पकड़ी और बाजार में मैकबुक और मैक पीसी नाम के उत्पाद उतारे। इन उत्पादों के बाद कंपनी की प्रसिद्धि और बाजार दोनों में ही काफी इजाफा हुआ।
अपनी दूसरी पारी की शुरू करने के १० बाद जॉब्स को उस समय भारी सफलता मिली जब एप्पल ने आईफोन का निर्माण कर दिया। इसके बाद तो जॉब्स और कंपनी के रूतबे में अचानक से ही बहुत बढ़ोतरी हुई। कुछ लोगों ने तो आईफोन के निर्माण को तकनीकी क्रांति की संज्ञा दे दी और यह बात कुछ हद तक सही भी थी क्योंकि केवल बात और मैसेज तक सीमित रहने वाला मोबाइल फोन एक चलता-फिरता कम्प्यूटर जो बन गया था
लेकिन तकनीकी क्षेत्र का यह व्यक्ति अपने स्वास्थ्य से हार गया। लीवर और कैंसर से ग्रसित होने के बाद जॉब्स ने कंपनी के सीईओ पद से इस्तीफा दे दिया। जॉब्स अपने कार्यकाल के दौरान कंपनी से वेतन के रूप में केवल एक डॉलर की राशि लेते रहे हैं, हालांकि उनके समस्त खर्चे कंपनी ही उठाती रही है।
बीमारी का असर उनके व्यक्तित्व पर भी पड़ा और वे एक जिद्दी नेता बन गए जो हर हाल में अपने एजेंडे को पूरा करना चाहता है। इसे उनकी मेहनत का ही परिणाम कहा जा सकता है कि आज एप्पल दुनिया का सबसे ब्रांड बन गया है।
खुशखबरीः अब रोमिंग पर नहीं लगेगा कोई चार्ज!
मोबाइल फोन का इस्तेमाल करने वाले करोड़ों लोगों के लिए बड़ी खुशखबरी है। दरअसल टेलीकॉम पॉलिसी 2011 के ड्राफ्ट में इस बात की सिफारिश कर दी गई है कि नेशनल रोमिंग के दौरान लगाए जाने वाले शुल्कों को पूरी तरह खत्म कर दिया जाए। इससे उन मोबाइल उपभोक्ताओं को काफी फायदा होगा जो अक्सर अपने राज्य से बाहर सफर करते रहते हैं। इसके लिए नई पॉलिसी में- ‘वन नेशन, वन लाइसेंसे’ की पॉलिसी अपनाने की बात कही गई है।
आपको बता दें कि अमेरिका समेत दुनिया के कई देशों में मोबाइल ऑपरेटरों के लिए ‘सिंगल परमिट लाइसेंस’ की व्यवस्था है। यानी एक ही परमिट पर वे देशभर में टेलीकॉम सेवाएं दे सकते हैं। जबकी भारत को 22 अलग अलग टेलीकॉम सर्किलों में बांटा गया है। और मोबाइल कंपनियों को सभी सर्किलों के लिए अलग अलग लाइसेंस लेना पड़ता है। ऐसे में मोबाइल ग्राहक भी जब अलग अलग सर्किलों में जाते हैं तो उनसे इसके लिए चार्ज वसूला जाता है।
लेकिन नई टेलीकॉम पॉलिसी के प्रस्तावों से इस समस्या से निजात मिल सकती है। माना जा रहा है कि इस साल के अंत तक इन प्रस्तावों को पेश कर दिया जाएगा। और अगर इन्हे लागू कर दिया जाता है तो मोबाइल इस्तेमाल करने वाले लोगों को इससे काफी फायदा होगा।
आपको बता दें कि अमेरिका समेत दुनिया के कई देशों में मोबाइल ऑपरेटरों के लिए ‘सिंगल परमिट लाइसेंस’ की व्यवस्था है। यानी एक ही परमिट पर वे देशभर में टेलीकॉम सेवाएं दे सकते हैं। जबकी भारत को 22 अलग अलग टेलीकॉम सर्किलों में बांटा गया है। और मोबाइल कंपनियों को सभी सर्किलों के लिए अलग अलग लाइसेंस लेना पड़ता है। ऐसे में मोबाइल ग्राहक भी जब अलग अलग सर्किलों में जाते हैं तो उनसे इसके लिए चार्ज वसूला जाता है।
लेकिन नई टेलीकॉम पॉलिसी के प्रस्तावों से इस समस्या से निजात मिल सकती है। माना जा रहा है कि इस साल के अंत तक इन प्रस्तावों को पेश कर दिया जाएगा। और अगर इन्हे लागू कर दिया जाता है तो मोबाइल इस्तेमाल करने वाले लोगों को इससे काफी फायदा होगा।
Monday, May 2
अमरीकी सेना ने आखिर मार गिराया लादेन
दुनिया का सबसे खतरनाक आतंकी ओसामा बिन लादेन आखिरकार एक अमरीकी सैन्य कार्रवाई में मारा गया है। कार्रवाई के बाद अमरीकी सेना ने उसके शव को अपने कब्जे में ले लिया है।
ओसामा बिन लादेन के मारे जाने की पुष्टि खुद अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने मीडिया के सामने आकर की। इसके तुरंत बाद भारी संख्या में लोग व्हाइट हाउस पर जमा हो गए और और लोग स़डकों पर उतर आए। लादेन पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद से 90 किलोमीटर दूर एबटाबाद में एक दो मंजिला मकान में छिपा हुआ था। लादेन के वहां छिपे होने की पुख्ता जानकारी के बाद अमरीकी सेना ने बीती अर्ध रात्रि को इस कार्रवाई को अंजाम दिया।
स्थानीय लोगों के रात करीब एक बजे एक हेलिकॉप्टरकाफी नीचाई पर मंडराता हुआ आया और पहले दो धमाके सुने गए।
इसके बाद एक जबर्दस्त धमाका हुआ, जो पूरे एबटाबाद में सुना गया। इसके कुछ देर बाद ही करीब एक बजकर 20-25 मिनट के बीच हेलिकॉप्टर में धमाका हुआ और गिर गया। उसके कुछ देर बाद ही एक और हेलिकॉप्टर आया और कुछ धमाके सुने गए।
न्यूयार्क के वल्र्ड ट्रेड सेंटर और पेंटागन की इमारत पर हमले के बाद से ही लादेन अमेरिका के सर्वाधिक वांछित व्यक्तियों की सूची में शीर्ष पर था। 9/11 के हमले के मुख्य साजिशकर्ता लादेन ने हमले के बाद कहा था कि हमले का परिणाम उसकी उम्मीदों से अधिक रहा। वह एक दशक से अमेरिकी और उसके सहयोगी बलों की आंखों में धूल झोंक कर बचता रहा है, जबकि उसके सिर पर 2.50 करो़ड डॉलर का इनाम घोषित था। वाशिंगटन के एक रणनीतिक थिंक टैंक, स्ट्रैटफॉर ने कहा है कि लादेन अलकायदा का प्रतीक बन गया था, यद्यपि जिस तरह से उसने संगठन को संचालित किया वह संदिग्ध है। स्ट्रेटफॉर ने कहा है, ""उसके मौत का प्रतीकात्मक महत्व स्पष्ट है। अमेरिका इसे एक ब़डी जीत बता सकता है।
एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि ओबामा प्रशासन ने लादेन के बारे में जुटाई गई जानकारी पाकिस्तान समेत किसी देश से शेयर नहीं की थी। अमरीकी सरकार के कुछ लोग ही इस ऑपरेशन के बारे में जानते थे। हमले में कोई भी अमरीकी सैनिक हताहत नहीं हुआ। अमरीकी सैनिक लादेन का शव अफगानिस्तान स्थित अपने एयरबेस मे ले गए। वहां उसका डीएनए टेस्ट कराया गया, जिसमें उसके लादेन होने की पुष्टि हो गई।
ओसामा बिन लादेन के मारे जाने की पुष्टि खुद अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने मीडिया के सामने आकर की। इसके तुरंत बाद भारी संख्या में लोग व्हाइट हाउस पर जमा हो गए और और लोग स़डकों पर उतर आए। लादेन पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद से 90 किलोमीटर दूर एबटाबाद में एक दो मंजिला मकान में छिपा हुआ था। लादेन के वहां छिपे होने की पुख्ता जानकारी के बाद अमरीकी सेना ने बीती अर्ध रात्रि को इस कार्रवाई को अंजाम दिया।
स्थानीय लोगों के रात करीब एक बजे एक हेलिकॉप्टरकाफी नीचाई पर मंडराता हुआ आया और पहले दो धमाके सुने गए।
इसके बाद एक जबर्दस्त धमाका हुआ, जो पूरे एबटाबाद में सुना गया। इसके कुछ देर बाद ही करीब एक बजकर 20-25 मिनट के बीच हेलिकॉप्टर में धमाका हुआ और गिर गया। उसके कुछ देर बाद ही एक और हेलिकॉप्टर आया और कुछ धमाके सुने गए।
न्यूयार्क के वल्र्ड ट्रेड सेंटर और पेंटागन की इमारत पर हमले के बाद से ही लादेन अमेरिका के सर्वाधिक वांछित व्यक्तियों की सूची में शीर्ष पर था। 9/11 के हमले के मुख्य साजिशकर्ता लादेन ने हमले के बाद कहा था कि हमले का परिणाम उसकी उम्मीदों से अधिक रहा। वह एक दशक से अमेरिकी और उसके सहयोगी बलों की आंखों में धूल झोंक कर बचता रहा है, जबकि उसके सिर पर 2.50 करो़ड डॉलर का इनाम घोषित था। वाशिंगटन के एक रणनीतिक थिंक टैंक, स्ट्रैटफॉर ने कहा है कि लादेन अलकायदा का प्रतीक बन गया था, यद्यपि जिस तरह से उसने संगठन को संचालित किया वह संदिग्ध है। स्ट्रेटफॉर ने कहा है, ""उसके मौत का प्रतीकात्मक महत्व स्पष्ट है। अमेरिका इसे एक ब़डी जीत बता सकता है।
एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि ओबामा प्रशासन ने लादेन के बारे में जुटाई गई जानकारी पाकिस्तान समेत किसी देश से शेयर नहीं की थी। अमरीकी सरकार के कुछ लोग ही इस ऑपरेशन के बारे में जानते थे। हमले में कोई भी अमरीकी सैनिक हताहत नहीं हुआ। अमरीकी सैनिक लादेन का शव अफगानिस्तान स्थित अपने एयरबेस मे ले गए। वहां उसका डीएनए टेस्ट कराया गया, जिसमें उसके लादेन होने की पुष्टि हो गई।
Saturday, April 9
'सचिन 200 प्रतिशत भारत रत्न के हक़दार' - धोनी
भारत को विश्व कप दिलाने वाली क्रिकेट टीम के कप्तान महेंद्र सिंह धोनी सचिन तेंदुलकर को भारत रत्न दिए जाने के दो सौ प्रतिशत पक्ष में हैं.
सचिन को ये सम्मान देने की माँग काफ़ी पहले से होती रही है मगर विश्व कप जीतने के बाद से ये और ज़ोर पकड़ रही है. इससे अभी एक ही दिन पहले महाराष्ट्र विधानसभा की ओर से भी इस बारे में एक प्रस्ताव पारित किया गया है.
इंडियन प्रीमियर लीग के चौथे संस्करण में हिस्सा लेने चेन्नई पहुँचे धोनी ने कहा, "सचिन भारत रत्न के लिए 200 प्रतिशत सबसे आदर्श प्रत्याशी हैं. उन्होंने 21 वर्षों तक देश की सेवा की है और अभी आने वाले कुछ और वर्षों तक करेंगे."
उन्होंने कहा, "बतौर क्रिकेटर अगर सचिन को भारत रत्न नहीं मिलता तो मुझे नहीं लगता कि कभी भी किसी क्रिकेटर को ये सम्मान मिलेगा. उन्होंने क्रिकेट को एग नए स्तर तक पहुँचाया है और जहाँ लोग क्रिकेट के बारे में ज़्यादा नहीं जानते वहाँ भी सचिन को वो जानते हैं."
इससे पहले सचिन ने धोनी को सर्वश्रेष्ठ कप्तान बताया था जिसके साथ उन्होंने क्रिकेट खेला है. इस बारे में पूछे जाने पर धोनी ने कहा, "मेरे लिए ये बहुत ही ख़ुशी की बात है कि सचिन ने मेरे बारे में ये बात कही है."
उन्होंने कहा, "सचिन की ही तरह मैं भी देश की सेवा कर रहा हूँ. मुझे जो भी काम दिया गया है मैंने उसे पूरी ईमानदारी से करने की कोशिश की है. मुझे ख़ुशी है कि सचिन को मेरे साथ खेलकर अच्छा लगा है."
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