बिहार के सुशील कुमार ने 'कौन बनेगा करोड़पति' में पाँच करोड़ की पुरस्कार राशि जीतने में सफलता पाई है. बिहार के चंपारण के रहने वाले सुशील कुमार पेशे से एक शिक्षक हैं और उनकी मासिक आय छह हज़ार रुपए है.
कौन बनेगा करोड़पति के पाँचवें संस्करण की सर्वोच्च पुरस्कार राशि जीतने के बाद शो के एंकर अमिताभ बच्चन ने उन्हें मीडिया के सामने पेश किया.
अमिताभ बच्चन ने उनकी जमकर सराहना की है और कहा कि सुशील कुमार बहुत अच्छा खेले.
अमिताभ बच्चन ने कहा, "सुशील कुमार एक छोटे से गाँव से हैं. ये चंपारण, बिहार से हैं. ये वहाँ एक शिक्षक और कंप्यूटर ऑपरेटर भी हैं. इनके पास टीवी भी नहीं है. ये किसी और के यहाँ जाकर कौन बनेगा करोड़पति देखते थे."
उन्होंने सुशील कुमार के दृढ़ निश्चय की तारीफ़ की और कहा कि आम आदमी जो ठान लेता है, वो करके दिखाता है और सुशील कुमार इसका जीता-जागता नमूना हैं.
इस मौक़े पर सुशील कुमार की ख़ुशी छिपाए नहीं छिप रही थी. उन्होंने कहा कि उन्होंने सोचा नहीं था कि वे पाँच करोड़ जीत जाएँगे.
सुशील कुमार ने कहा, "मेरा घर टूटा हुआ है. मुझे घर बनवाना है. मैंने सोचा था कि घर का पुनर्निर्माण कराऊँगा, लेकिन अब तो मैं नया घर बनाऊँगा."
उन्होंने कहा कि वे अपने सभी भाइयों की मदद करेंगे. सुशील कुमार ने कहा कि उन्हें पढ़ने-लिखने का बहुत शौक है और पैसे की कमी के कारण ऐसा नहीं कर पाते थे.
सुशील कुमार ने कहा कि अब वे ख़ूब पढ़ाई करेंगे. उन्होंने कहा कि इसकी उन्होंने ख़ास तैयारी नहीं की थी. सुशील कुमार ने कहा कि इसमें वैसे ही सवाल पूछे जाते हैं, जो सामान्य प्रतियोगी परीक्षाओं में पूछे जाते हैं.
बम फ़ोड़ने की ज़िम्मेदारी-सुशील के हर सही उत्तर पर तेज़ आवाज़ वाले बम फ़ोड़ने की ज़िम्मेदारी भाई सुधीर ने अपने कंधों पर ले रखी थी. साथ में रखे लाऊडस्पीकर कार्यक्रम की आवाज़ दूर-दूर तक पहुँचा रहे थे.
पिता अमरनाथ प्रसाद पर्दे के ठीक बगल में एक कुर्सी पर बैठे थे. जैसे ही सुशील फ़ास्टेस्ट फ़िंगर फ़र्स्ट जीतकर अभिताभ बच्चन के सामने बैठे, हर जगह सीटियाँ बजनी शुरू हो गईं.
प्रेरणा- मोतीहारी में लोगों की ज़ुबान पर सुशील का नाम है. लोगों का कहना है कि सुशील की वजह से लोगों को उनसे बहुत प्रेरणा मिली है.
स्थानीय निवासी कृष्ण कुमार कहते हैं कि सुशील की वजह से पढ़ाई कर रहे बच्चों में एक नई उमंग जागृत हुई है, कि अगर पढ़ाई के बल पर सुशील ये सब हासिल कर सकता है तो मैं क्यों नहीं.
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Wednesday, November 2
Monday, September 19
HEART TOUCHING LINES
Most Touching Lines by a boy whoz beloved was marrying sum1 else...
"Aaj dulhan ke laal jode me use uski saheliyon ne sajaya hoga,,,
meri jaan ke gore haathon ko mehandi se sajaya hoga...
bahut gehra chadha hoga mehndi ka rang,,,
...us mehndi me usne mera naam chhupaya hoga....
rah rah ke ro padi hogi,,,jb usko mera khayal aaya hoga....
khud ko dekha hoga jab aaine me to chehra mera bhi nazar aaya hoga...
bahut pyaari lag rahi hogi wo,,..aaj..
dekh kr usko chand bhi sharmaya hoga...
aaj meri jaan ne apne maa baap ki izzat ko bachaya hoga...
usne beti hone ka har farz nibhaya hoga. . . .
sochta hu kis tarah usne khud ko samjhaya hoga...
apne hathon se hamare khaton ko jalaya hoga...
khud ko mazbut banaakar meri yado ko mitaya hoga...
bhukhi hogi wo jaanta hu main,,mere bina usne kuch na khaya hoga..
aaj usne sab kuch peechay chhor ke kisi anjaan ko ,
apni zindagi ka humsafar banaya hoga.....
"Aaj dulhan ke laal jode me use uski saheliyon ne sajaya hoga,,,
meri jaan ke gore haathon ko mehandi se sajaya hoga...
bahut gehra chadha hoga mehndi ka rang,,,
...us mehndi me usne mera naam chhupaya hoga....
rah rah ke ro padi hogi,,,jb usko mera khayal aaya hoga....
khud ko dekha hoga jab aaine me to chehra mera bhi nazar aaya hoga...
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apni zindagi ka humsafar banaya hoga.....
Thursday, September 15
करिश्माई व्यक्तित्व वाले जॉब्स
जब स्टीव जॉब्स ने अपनी कॉलेज की पढ़ाई बीच में छोड़ी थी तो शायद ही किसी को कोई फर्क पड़ा हो लेकिन अब जब उन्होंने एप्पल के सीईओ पद को छोड़ा है तो सारी दुनिया हिल गई है और बाजार में भूकंप सा आ गया है।
केवल एक सेमेस्टर के बाद पढ़ाई छोड़ देने वाले स्टीव को प्रतिभा का धनी छात्र माना जाता था। स्टीव ७० के दशक में पढ़ाई करने के बजाय अध्यात्म की तलाश में भारत आ गए और जब वे अमेरिका वापस लौटे तो बौद्ध बन चुके थे हालांकि उनके पिता एक सीरियाई मुसलमान थे।
लगभग चार साल के कम समय में ही आईपैड और आईफोन से दुनिया में छा जाने वाले एप्पल का दिल, दिमाग और आत्मा जॉब्स को ही माना जाता है। दुनिया के दूसरे सीईओ की तरह टाई और कोर्ट के बजाय वे पूरी बांह की काली टी शर्ट और जींस पहनना पसंद करते हैं। जॉब्स ने १९७६ में अपने कुछ दोस्तों के साथ मिलकर एप्पल कम्प्यूटर को शुरू किया था।
अथक मेहनत से कंपनी तो जम गई लेकिन हालात कुछ ऐसे बने कि जॉब्स का कंपनी के साथ बने रहना मुश्किल हो गया और अंतत: १९८५ में उन्हें एप्पल कम्प्यूटर को छोड़ देना पड़ा। लेकिन उनका जाना कंपनी के लिए नुकसान दायक सिद्ध हुआ और जितनी तरक्की कंपनी ने उनके नेतृत्व में की जॉब्स के बाद वह तरक्की थमने लगी।
इसी बीच माइक्रोसॉफ्ट को टक्कर देने के लिए एप्पल को जॉब्स की जरूरत महसूस हुई और उन्हें १२ साल बाद एक बार फिर से १९९७ में एप्पल में वापस बुला लिया गया। उनके नेतृत्व में कंपनी ने एक बार फिर रफ्तार पकड़ी और बाजार में मैकबुक और मैक पीसी नाम के उत्पाद उतारे। इन उत्पादों के बाद कंपनी की प्रसिद्धि और बाजार दोनों में ही काफी इजाफा हुआ।
अपनी दूसरी पारी की शुरू करने के १० बाद जॉब्स को उस समय भारी सफलता मिली जब एप्पल ने आईफोन का निर्माण कर दिया। इसके बाद तो जॉब्स और कंपनी के रूतबे में अचानक से ही बहुत बढ़ोतरी हुई। कुछ लोगों ने तो आईफोन के निर्माण को तकनीकी क्रांति की संज्ञा दे दी और यह बात कुछ हद तक सही भी थी क्योंकि केवल बात और मैसेज तक सीमित रहने वाला मोबाइल फोन एक चलता-फिरता कम्प्यूटर जो बन गया था
लेकिन तकनीकी क्षेत्र का यह व्यक्ति अपने स्वास्थ्य से हार गया। लीवर और कैंसर से ग्रसित होने के बाद जॉब्स ने कंपनी के सीईओ पद से इस्तीफा दे दिया। जॉब्स अपने कार्यकाल के दौरान कंपनी से वेतन के रूप में केवल एक डॉलर की राशि लेते रहे हैं, हालांकि उनके समस्त खर्चे कंपनी ही उठाती रही है।
बीमारी का असर उनके व्यक्तित्व पर भी पड़ा और वे एक जिद्दी नेता बन गए जो हर हाल में अपने एजेंडे को पूरा करना चाहता है। इसे उनकी मेहनत का ही परिणाम कहा जा सकता है कि आज एप्पल दुनिया का सबसे ब्रांड बन गया है।
केवल एक सेमेस्टर के बाद पढ़ाई छोड़ देने वाले स्टीव को प्रतिभा का धनी छात्र माना जाता था। स्टीव ७० के दशक में पढ़ाई करने के बजाय अध्यात्म की तलाश में भारत आ गए और जब वे अमेरिका वापस लौटे तो बौद्ध बन चुके थे हालांकि उनके पिता एक सीरियाई मुसलमान थे।
लगभग चार साल के कम समय में ही आईपैड और आईफोन से दुनिया में छा जाने वाले एप्पल का दिल, दिमाग और आत्मा जॉब्स को ही माना जाता है। दुनिया के दूसरे सीईओ की तरह टाई और कोर्ट के बजाय वे पूरी बांह की काली टी शर्ट और जींस पहनना पसंद करते हैं। जॉब्स ने १९७६ में अपने कुछ दोस्तों के साथ मिलकर एप्पल कम्प्यूटर को शुरू किया था।
अथक मेहनत से कंपनी तो जम गई लेकिन हालात कुछ ऐसे बने कि जॉब्स का कंपनी के साथ बने रहना मुश्किल हो गया और अंतत: १९८५ में उन्हें एप्पल कम्प्यूटर को छोड़ देना पड़ा। लेकिन उनका जाना कंपनी के लिए नुकसान दायक सिद्ध हुआ और जितनी तरक्की कंपनी ने उनके नेतृत्व में की जॉब्स के बाद वह तरक्की थमने लगी।
इसी बीच माइक्रोसॉफ्ट को टक्कर देने के लिए एप्पल को जॉब्स की जरूरत महसूस हुई और उन्हें १२ साल बाद एक बार फिर से १९९७ में एप्पल में वापस बुला लिया गया। उनके नेतृत्व में कंपनी ने एक बार फिर रफ्तार पकड़ी और बाजार में मैकबुक और मैक पीसी नाम के उत्पाद उतारे। इन उत्पादों के बाद कंपनी की प्रसिद्धि और बाजार दोनों में ही काफी इजाफा हुआ।
अपनी दूसरी पारी की शुरू करने के १० बाद जॉब्स को उस समय भारी सफलता मिली जब एप्पल ने आईफोन का निर्माण कर दिया। इसके बाद तो जॉब्स और कंपनी के रूतबे में अचानक से ही बहुत बढ़ोतरी हुई। कुछ लोगों ने तो आईफोन के निर्माण को तकनीकी क्रांति की संज्ञा दे दी और यह बात कुछ हद तक सही भी थी क्योंकि केवल बात और मैसेज तक सीमित रहने वाला मोबाइल फोन एक चलता-फिरता कम्प्यूटर जो बन गया था
लेकिन तकनीकी क्षेत्र का यह व्यक्ति अपने स्वास्थ्य से हार गया। लीवर और कैंसर से ग्रसित होने के बाद जॉब्स ने कंपनी के सीईओ पद से इस्तीफा दे दिया। जॉब्स अपने कार्यकाल के दौरान कंपनी से वेतन के रूप में केवल एक डॉलर की राशि लेते रहे हैं, हालांकि उनके समस्त खर्चे कंपनी ही उठाती रही है।
बीमारी का असर उनके व्यक्तित्व पर भी पड़ा और वे एक जिद्दी नेता बन गए जो हर हाल में अपने एजेंडे को पूरा करना चाहता है। इसे उनकी मेहनत का ही परिणाम कहा जा सकता है कि आज एप्पल दुनिया का सबसे ब्रांड बन गया है।
Monday, May 2
अमरीकी सेना ने आखिर मार गिराया लादेन
दुनिया का सबसे खतरनाक आतंकी ओसामा बिन लादेन आखिरकार एक अमरीकी सैन्य कार्रवाई में मारा गया है। कार्रवाई के बाद अमरीकी सेना ने उसके शव को अपने कब्जे में ले लिया है।
ओसामा बिन लादेन के मारे जाने की पुष्टि खुद अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने मीडिया के सामने आकर की। इसके तुरंत बाद भारी संख्या में लोग व्हाइट हाउस पर जमा हो गए और और लोग स़डकों पर उतर आए। लादेन पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद से 90 किलोमीटर दूर एबटाबाद में एक दो मंजिला मकान में छिपा हुआ था। लादेन के वहां छिपे होने की पुख्ता जानकारी के बाद अमरीकी सेना ने बीती अर्ध रात्रि को इस कार्रवाई को अंजाम दिया।
स्थानीय लोगों के रात करीब एक बजे एक हेलिकॉप्टरकाफी नीचाई पर मंडराता हुआ आया और पहले दो धमाके सुने गए।
इसके बाद एक जबर्दस्त धमाका हुआ, जो पूरे एबटाबाद में सुना गया। इसके कुछ देर बाद ही करीब एक बजकर 20-25 मिनट के बीच हेलिकॉप्टर में धमाका हुआ और गिर गया। उसके कुछ देर बाद ही एक और हेलिकॉप्टर आया और कुछ धमाके सुने गए।
न्यूयार्क के वल्र्ड ट्रेड सेंटर और पेंटागन की इमारत पर हमले के बाद से ही लादेन अमेरिका के सर्वाधिक वांछित व्यक्तियों की सूची में शीर्ष पर था। 9/11 के हमले के मुख्य साजिशकर्ता लादेन ने हमले के बाद कहा था कि हमले का परिणाम उसकी उम्मीदों से अधिक रहा। वह एक दशक से अमेरिकी और उसके सहयोगी बलों की आंखों में धूल झोंक कर बचता रहा है, जबकि उसके सिर पर 2.50 करो़ड डॉलर का इनाम घोषित था। वाशिंगटन के एक रणनीतिक थिंक टैंक, स्ट्रैटफॉर ने कहा है कि लादेन अलकायदा का प्रतीक बन गया था, यद्यपि जिस तरह से उसने संगठन को संचालित किया वह संदिग्ध है। स्ट्रेटफॉर ने कहा है, ""उसके मौत का प्रतीकात्मक महत्व स्पष्ट है। अमेरिका इसे एक ब़डी जीत बता सकता है।
एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि ओबामा प्रशासन ने लादेन के बारे में जुटाई गई जानकारी पाकिस्तान समेत किसी देश से शेयर नहीं की थी। अमरीकी सरकार के कुछ लोग ही इस ऑपरेशन के बारे में जानते थे। हमले में कोई भी अमरीकी सैनिक हताहत नहीं हुआ। अमरीकी सैनिक लादेन का शव अफगानिस्तान स्थित अपने एयरबेस मे ले गए। वहां उसका डीएनए टेस्ट कराया गया, जिसमें उसके लादेन होने की पुष्टि हो गई।
ओसामा बिन लादेन के मारे जाने की पुष्टि खुद अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने मीडिया के सामने आकर की। इसके तुरंत बाद भारी संख्या में लोग व्हाइट हाउस पर जमा हो गए और और लोग स़डकों पर उतर आए। लादेन पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद से 90 किलोमीटर दूर एबटाबाद में एक दो मंजिला मकान में छिपा हुआ था। लादेन के वहां छिपे होने की पुख्ता जानकारी के बाद अमरीकी सेना ने बीती अर्ध रात्रि को इस कार्रवाई को अंजाम दिया।
स्थानीय लोगों के रात करीब एक बजे एक हेलिकॉप्टरकाफी नीचाई पर मंडराता हुआ आया और पहले दो धमाके सुने गए।
इसके बाद एक जबर्दस्त धमाका हुआ, जो पूरे एबटाबाद में सुना गया। इसके कुछ देर बाद ही करीब एक बजकर 20-25 मिनट के बीच हेलिकॉप्टर में धमाका हुआ और गिर गया। उसके कुछ देर बाद ही एक और हेलिकॉप्टर आया और कुछ धमाके सुने गए।
न्यूयार्क के वल्र्ड ट्रेड सेंटर और पेंटागन की इमारत पर हमले के बाद से ही लादेन अमेरिका के सर्वाधिक वांछित व्यक्तियों की सूची में शीर्ष पर था। 9/11 के हमले के मुख्य साजिशकर्ता लादेन ने हमले के बाद कहा था कि हमले का परिणाम उसकी उम्मीदों से अधिक रहा। वह एक दशक से अमेरिकी और उसके सहयोगी बलों की आंखों में धूल झोंक कर बचता रहा है, जबकि उसके सिर पर 2.50 करो़ड डॉलर का इनाम घोषित था। वाशिंगटन के एक रणनीतिक थिंक टैंक, स्ट्रैटफॉर ने कहा है कि लादेन अलकायदा का प्रतीक बन गया था, यद्यपि जिस तरह से उसने संगठन को संचालित किया वह संदिग्ध है। स्ट्रेटफॉर ने कहा है, ""उसके मौत का प्रतीकात्मक महत्व स्पष्ट है। अमेरिका इसे एक ब़डी जीत बता सकता है।
एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि ओबामा प्रशासन ने लादेन के बारे में जुटाई गई जानकारी पाकिस्तान समेत किसी देश से शेयर नहीं की थी। अमरीकी सरकार के कुछ लोग ही इस ऑपरेशन के बारे में जानते थे। हमले में कोई भी अमरीकी सैनिक हताहत नहीं हुआ। अमरीकी सैनिक लादेन का शव अफगानिस्तान स्थित अपने एयरबेस मे ले गए। वहां उसका डीएनए टेस्ट कराया गया, जिसमें उसके लादेन होने की पुष्टि हो गई।
Saturday, April 9
'सचिन 200 प्रतिशत भारत रत्न के हक़दार' - धोनी
भारत को विश्व कप दिलाने वाली क्रिकेट टीम के कप्तान महेंद्र सिंह धोनी सचिन तेंदुलकर को भारत रत्न दिए जाने के दो सौ प्रतिशत पक्ष में हैं.
सचिन को ये सम्मान देने की माँग काफ़ी पहले से होती रही है मगर विश्व कप जीतने के बाद से ये और ज़ोर पकड़ रही है. इससे अभी एक ही दिन पहले महाराष्ट्र विधानसभा की ओर से भी इस बारे में एक प्रस्ताव पारित किया गया है.
इंडियन प्रीमियर लीग के चौथे संस्करण में हिस्सा लेने चेन्नई पहुँचे धोनी ने कहा, "सचिन भारत रत्न के लिए 200 प्रतिशत सबसे आदर्श प्रत्याशी हैं. उन्होंने 21 वर्षों तक देश की सेवा की है और अभी आने वाले कुछ और वर्षों तक करेंगे."
उन्होंने कहा, "बतौर क्रिकेटर अगर सचिन को भारत रत्न नहीं मिलता तो मुझे नहीं लगता कि कभी भी किसी क्रिकेटर को ये सम्मान मिलेगा. उन्होंने क्रिकेट को एग नए स्तर तक पहुँचाया है और जहाँ लोग क्रिकेट के बारे में ज़्यादा नहीं जानते वहाँ भी सचिन को वो जानते हैं."
इससे पहले सचिन ने धोनी को सर्वश्रेष्ठ कप्तान बताया था जिसके साथ उन्होंने क्रिकेट खेला है. इस बारे में पूछे जाने पर धोनी ने कहा, "मेरे लिए ये बहुत ही ख़ुशी की बात है कि सचिन ने मेरे बारे में ये बात कही है."
उन्होंने कहा, "सचिन की ही तरह मैं भी देश की सेवा कर रहा हूँ. मुझे जो भी काम दिया गया है मैंने उसे पूरी ईमानदारी से करने की कोशिश की है. मुझे ख़ुशी है कि सचिन को मेरे साथ खेलकर अच्छा लगा है."
14 साल की उम्र में आईआईटी
चौदह साल की उम्र में बच्चे अक्सर ये नहीं जानते कि उन्हे ज़िंदगी में आगे क्या करना है,पर दिल्ली के सहल कौशिक को इस उम्र मे न सिर्फ पता है कि उन्हें ज़िंदगी में आगे क्या करना है बल्कि उहोंने इस ओर अपने कदम भी बढ़ा दिए है.
सहल कौशिक ने 12वीं कक्षा के बाद देश की सबसे मुश्किल प्रतियोगिताओं में से एक माने जाने वाली आईआईटी परीक्षा में 33वां स्थान हासिल किया है और दिल्ली क्षेत्र में वे पहले स्थान पर रहे है. चौदह साल की उम्र में वे देश के सबसे छोटे आईआईटीयन बन गए हैं.
सहल एशियन ओलंपियाड में भी भारत की नुमाइंदगी कर चुके है. इससे पहले सहल कौशिक को कम उम्र की वजह से 10वीं की परीक्षा देने के लिए भी दिल्ली उच्च न्यायालय से विशेष अनुमति लेनी पड़ी थी.
सहल की माँ रुचि कौशिक से हमने पूछा कि उन्होने सहल के स्कूल में क्या नहीं पढाया, तो रुचि कौशिक कहती है. "सहल बचपन से ही काफी तेज़ था. हमने सोचा कि चलो घर पर पढ़ा कर देखते है, क्योकि अगर वो स्कूल जाएगा तो वो उसे वही पढ़ाएँगे जो वो पहले से ही जानता है."
सहल बचपन से ही प्रतिभा के धनी है. जब वे सिर्फ छह साल के थे तभी से सहल उपन्यास पढ़ने लगे थे.
सहल को पढ़ने के अलावा गाने सुनना और उपन्यास पढ़ना पसंद है.
सहल से जब हमने पूछा कि आईआईटी परीक्षा मे सफलता के लिए वो क्या गुर देंगे. सहल कहते है "अपने कॉन्सेप्ट पर पकड़ रखें. पिछले साल के पेपर की मदद से अभ्यास करें और पाठयक्रम की किताबे जरुर पढ़ें."
सहल अपनी सफलता का श्रेय अपनी माँ और नारायना ऐकेडमी मे फिजिक्स के अध्यापक उदय प्रताप सिंह को देते है.
लेकिन भविष्य में क्या करना चाहतें है इस मामले में भी सहल की सोच ज़रा अलग है. उन्होंने आईआईटी में 33वां स्थान हासिल किया है लेकिन वे दिल से इंजिनियरिगं के बजाए फिजिक्स मे बीएससी करना चाहते है ताकि एस्ट्रो- फिजिक्स में अनुसंधान कर सकें.
उसकी कामयाबी एक मिसाल है
कानपुर स्थित यशोदानगर की गंगा विहार कालोनी ग़रीबों की बस्ती है. इसी बस्ती में रहते हैं मोची राजेन्द्र प्रसाद जिनके अठारह साल के बेटे अभिषेक भारती ने आईआईटी इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा में सफल होकर एक मिसाल क़ायम की है.
उन्होंने अनुसूचित जाति श्रेणी में 154 वां स्थान हासिल किया है.
घर के नाम पर दस गुना दस फुट का एक कमरा है. इसी एक कमरे में राजेंद्र प्रसाद, पत्नी संगीता और उनके चार बेटे रहते हैं.
कमरे के बीच में एक दरवाजा है, जो एक छोटे से आँगन में खुलता है. एक रस्सी पर कपड़े टंगे हैं. दरवाजे से दाहिनी तरफ एक तख्त है, जिसमें वे सब अखबार बिखरे हैं, जिनमें अभिषेक की कामयाबी की खबर मोटे-मोटे अक्षरों में छपी हैं.
बगल के घर में बिजली है, मगर अभिषेक के माँ-बाप के पास इतना पैसा नहीं कि कनेक्शन ले सकें, इसलिए अभिषेक और उसके तीनों भाई लालटेन की रोशनी में ही पढ़ाई करते हैं.
अभिषेक कहते हैं, “शुरुआत में तो मुझे नहीं पता था कि यह आईआईटी क्या होता है, मगर इंटर फर्स्ट ईयर में मेरे एक सर संदीप गोयल ने कहा कि आईआईटी भारत का एक टॉप का इम्तिहान होता है, तब मेरे मन में भी लगन लगी कि मुझे यह इम्तिहान पास करना है.”
अभिषेक कहते हैं, “मैं रोज लगभग सात-आठ घंटे पढ़ाई करता था. लेकिन मैंने कोई शेड्यूल नहीं बनाया कि इतने घंटे फिजिक्स, केमिस्ट्री या मैथ ही पढ़ना है, क्योंकि कोई बाध्यता होने से पढ़ाई में मज़ा नहीं आता. और मज़े के बिना आईआईटी नहीं निकलती.”
अभिषेक अपनी इस सफलता में भाभा कोचिंग को श्रेय देना नहीं भूलते, जिसने उन्हें मुफ्त में पढ़ाया.
अभिषेक के गणित के टीचर संदीप गोयल ने बताया कि उसके अंदर किसी विषय को समझने और सवालों को अपने ढंग से हल करने की विशेष क्षमता है.
राजेन्द्र प्रसाद के मुताबिक मैंने बेटे को बस यही समझाया था, "देखो! तुम्हें यह बूट पालिश का काम नहीं करना है."
अभिषेक आगे चलकर अंतरिक्ष विज्ञान पढ़ना चाहता है और पूर्व राष्ट्रपति अब्दुल कलाम उसके आदर्श हैं. मगर अभिषेक की दिलचस्पी राजनीति में बिलकुल नहीं है, क्योंकि उसके मुताबिक उत्तर प्रदेश की राजनीति में काफ़ी ज़्यादा भ्रष्टाचार है.
उन्होंने अनुसूचित जाति श्रेणी में 154 वां स्थान हासिल किया है.
घर के नाम पर दस गुना दस फुट का एक कमरा है. इसी एक कमरे में राजेंद्र प्रसाद, पत्नी संगीता और उनके चार बेटे रहते हैं.
कमरे के बीच में एक दरवाजा है, जो एक छोटे से आँगन में खुलता है. एक रस्सी पर कपड़े टंगे हैं. दरवाजे से दाहिनी तरफ एक तख्त है, जिसमें वे सब अखबार बिखरे हैं, जिनमें अभिषेक की कामयाबी की खबर मोटे-मोटे अक्षरों में छपी हैं.
बगल के घर में बिजली है, मगर अभिषेक के माँ-बाप के पास इतना पैसा नहीं कि कनेक्शन ले सकें, इसलिए अभिषेक और उसके तीनों भाई लालटेन की रोशनी में ही पढ़ाई करते हैं.
अभिषेक कहते हैं, “शुरुआत में तो मुझे नहीं पता था कि यह आईआईटी क्या होता है, मगर इंटर फर्स्ट ईयर में मेरे एक सर संदीप गोयल ने कहा कि आईआईटी भारत का एक टॉप का इम्तिहान होता है, तब मेरे मन में भी लगन लगी कि मुझे यह इम्तिहान पास करना है.”
अभिषेक कहते हैं, “मैं रोज लगभग सात-आठ घंटे पढ़ाई करता था. लेकिन मैंने कोई शेड्यूल नहीं बनाया कि इतने घंटे फिजिक्स, केमिस्ट्री या मैथ ही पढ़ना है, क्योंकि कोई बाध्यता होने से पढ़ाई में मज़ा नहीं आता. और मज़े के बिना आईआईटी नहीं निकलती.”
अभिषेक अपनी इस सफलता में भाभा कोचिंग को श्रेय देना नहीं भूलते, जिसने उन्हें मुफ्त में पढ़ाया.
अभिषेक के गणित के टीचर संदीप गोयल ने बताया कि उसके अंदर किसी विषय को समझने और सवालों को अपने ढंग से हल करने की विशेष क्षमता है.
राजेन्द्र प्रसाद के मुताबिक मैंने बेटे को बस यही समझाया था, "देखो! तुम्हें यह बूट पालिश का काम नहीं करना है."
अभिषेक आगे चलकर अंतरिक्ष विज्ञान पढ़ना चाहता है और पूर्व राष्ट्रपति अब्दुल कलाम उसके आदर्श हैं. मगर अभिषेक की दिलचस्पी राजनीति में बिलकुल नहीं है, क्योंकि उसके मुताबिक उत्तर प्रदेश की राजनीति में काफ़ी ज़्यादा भ्रष्टाचार है.
Tuesday, January 18
Things to learn from 3 idiots
Hi guys,
I am sure most of you have seen 3 idiots-The bockbuster of bollywood history of real life movies.
My opinion its a must watch. i am sure we would like to know what we have learned from the movie.
A BIG question floated in my mind - Is money the only criteria for Success?
Lets share our experiences of college days, Carrier, Friends, Campus, which you can relate to 3 idiots.
Reply With Quote
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School Days...
KG v/s 12th-std
KG: Kisi se dosti nhi thi or ladka ladki sb hath pakad kr chalte the..
12: Dosti b h or pyr b pr hath pakdne se darte the..
KG: Pencil, Rubber, sharpnr, scale sb roz le jate the...
12:Ek pen b dusri class se mangne jate the...
KG: Lunch se pehle hand wash n prayr krte the...
12:2nd period me hi lunch khtm kr dete the...
KG: Class me entr hne se pehle mam may i cum in bolte the...
12: Bina btaye hi pura period bunk pe rehte the...
KG: Bag me hr subjct Ki buk or copy dalte the...
12: Har subjct ki ek hi copy bnate the...
KG: Class test me star milta tha...
12:Full moon hi naseeb hota tha...
KG: Roz diary likhte the n mumy ko dikhate the...
12: 1st page pe details bhar kr diary kisi kone me fek dete the...
Nw d most unique bt b'ful diffrnce-
K.G. me aate waqt roye the...?
12th se jate waqt roye the....?
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12th se jate waqt roye the....?
Saturday, June 12
कभी माँग कर देखो आसमान मुझसे,
कभी माँग कर देखो आसमान मुझसे,
तोहफ़े मे पाओगे ख्वाबों की उढ़ान मुझसे,
तेरे आँखों की चांदनी मे अपना आशियाँ बना लूँगा,
जो चाहोगे उस चांद पर बनवाना एक मकान मुझसे।
जो माँगना है तो माँग लो आज तमाम सितारे,
कि मेरे होंठो से तेरे होंठो पे बिखर जायेंगे सारे,
और जो चाहो,तो परी,अप्सरा,या रानी बना दूँ,
मेरे दिल की सल्तनत तुम्हारी है,
जब कहो,महारानी बना दूँ !!
हसरत हो तो एक कविता भर से बना दूँ
तुमको इस जहाँ भर मे सबसे खूबसूरत,
बस ज़रा कहो तो क्या है तुम्हारी ज़रूरत!!
कि हवा का रूख बदलना कौन सा मुश्किल है,
की साँसों को साँसों से टकराने तो दो,और ज़मीं पे स्वर्ग का उतरना है मुमकिन,
कि हमे ज़रा अपने करीब आने तो दो!!
ये साँस तुम्हारी अमानत है,तुमको सौंप दूँगा,
अगर मेरी जान माँग लो मेरी जान मुझसे,
कभी माँग कर देखो आसमान मुझसे .....
तोहफ़े मे पाओगे ख्वाबों की उढ़ान मुझसे,
तेरे आँखों की चांदनी मे अपना आशियाँ बना लूँगा,
जो चाहोगे उस चांद पर बनवाना एक मकान मुझसे।
जो माँगना है तो माँग लो आज तमाम सितारे,
कि मेरे होंठो से तेरे होंठो पे बिखर जायेंगे सारे,
और जो चाहो,तो परी,अप्सरा,या रानी बना दूँ,
मेरे दिल की सल्तनत तुम्हारी है,
जब कहो,महारानी बना दूँ !!
हसरत हो तो एक कविता भर से बना दूँ
तुमको इस जहाँ भर मे सबसे खूबसूरत,
बस ज़रा कहो तो क्या है तुम्हारी ज़रूरत!!
कि हवा का रूख बदलना कौन सा मुश्किल है,
की साँसों को साँसों से टकराने तो दो,और ज़मीं पे स्वर्ग का उतरना है मुमकिन,
कि हमे ज़रा अपने करीब आने तो दो!!
ये साँस तुम्हारी अमानत है,तुमको सौंप दूँगा,
अगर मेरी जान माँग लो मेरी जान मुझसे,
कभी माँग कर देखो आसमान मुझसे .....
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