Friday, December 14
Being Happy Is Easy and Its in my Hands!!!!
I believe "Everything that happens, happens for good" ... Sometimes when we want to achieve something and try for it and fails, we think we are not worth it and stop trying and get frustrated .. We give excuses, like "this happens to me everytime" or "Why always me" or "God is not with me and m not lucky etc.. etc..
Have you ever used bow and arrow, or have u ever seen how to aim an arrow through bow .. To make the arrow go far away, we pull it back and then aim it and throw.... Similarly, if we are trying and failing each time, stop and think whats going wrong .. set back, give urself another chance and then aim and shoot urself to achieve ur goal ..
Positive Thinking always will help u getting ur goals set right and this will keep u happy always .. If u feel bad by failing, u will never be able to achieve ur goals .. This is bcz u will never get that energy which comes from positivity and ability that you shud knw abt u... and hence u will never try ....
Being happy resolves many of your problems, even in day to day life and provides you what your daily food cannot... Everyday try to make at least two people happy, one of those shud be you ... and see how beautiful world is, how nice people are and how easy it is to achieve your goals ...
Wednesday, December 7
कैसे सफलता की तरफ ले जाती है भगवद गीता
भगवद गीता निराशा से मुक्त कर देती है ,हर श्लोक अपने आप में परिपूर्ण है .महाभारत में कृष्ण सिर्फ
सारथि धर्म को ही निर्वाह करते हैं ,मतलब यह की यदि मनुष्य प्रबल आत्मविश्वास से कर्म करने के
पग भरता है तो प्रकृति उसका मार्गदर्शन करने के तैयार रहती है ,जरुरत है मजबूती से खडा होने की .
गीता "मेरापन " और " हमारा पन" यानि स्वार्थ तथा एकता की भावना के हानि और लाभ को दिखाती
है.गीता दैवीय गुणों के विकास का मार्ग दिखाती है .गीता कर्म के हर अंग की विवेचना तर्क संगत रूप
से करती है,गीता नीति को स्थापित करवाती है ,गीता अन्याय से लड़ने की शक्ति देती है ,गीता प्रेम के
रूप का सूक्ष्मता से वर्णन करती है .गीता सच्चे वैराग्य में जीना सिखाती है ,गीता मृत्यु के भय से
मुक्त करती है ,गीता निराशा को सहज ही तौड़ देती है .गीता कठिन परिस्थियों से संरक्षण करना सिखाती
है .गीता व्यवस्था सिखाती है .इतनी बड़ी कौरव सेना से जीतना कोई आसान काम नहीं था लेकिन सही
व्यवस्था से बड़े बड़ों पर काबू पाया जा सकता है .
गीता की व्याख्या ,टीका जरुर पढ़े .आप किसी भी धर्म के हो मगर जीवन को सच्चे अर्थ में जीना चाहते हैं
तो विभिन्न विद्वानों द्वारा की गयी गीता की व्याख्या को पढ़े ,समझे और अमल करे .सी राजगोपालाचारी
विनोबा,गांधी सभी दिग्गज स्वतंत्रता सेनानियों पर श्रीमद भगवत गीता का गहरा प्रभाव था
Wednesday, November 2
गाँव के सुशील कुमार ने जीते पाँच करोड़
बिहार के सुशील कुमार ने 'कौन बनेगा करोड़पति' में पाँच करोड़ की पुरस्कार राशि जीतने में सफलता पाई है. बिहार के चंपारण के रहने वाले सुशील कुमार पेशे से एक शिक्षक हैं और उनकी मासिक आय छह हज़ार रुपए है.
कौन बनेगा करोड़पति के पाँचवें संस्करण की सर्वोच्च पुरस्कार राशि जीतने के बाद शो के एंकर अमिताभ बच्चन ने उन्हें मीडिया के सामने पेश किया.
अमिताभ बच्चन ने उनकी जमकर सराहना की है और कहा कि सुशील कुमार बहुत अच्छा खेले.
अमिताभ बच्चन ने कहा, "सुशील कुमार एक छोटे से गाँव से हैं. ये चंपारण, बिहार से हैं. ये वहाँ एक शिक्षक और कंप्यूटर ऑपरेटर भी हैं. इनके पास टीवी भी नहीं है. ये किसी और के यहाँ जाकर कौन बनेगा करोड़पति देखते थे."
उन्होंने सुशील कुमार के दृढ़ निश्चय की तारीफ़ की और कहा कि आम आदमी जो ठान लेता है, वो करके दिखाता है और सुशील कुमार इसका जीता-जागता नमूना हैं.
इस मौक़े पर सुशील कुमार की ख़ुशी छिपाए नहीं छिप रही थी. उन्होंने कहा कि उन्होंने सोचा नहीं था कि वे पाँच करोड़ जीत जाएँगे.
सुशील कुमार ने कहा, "मेरा घर टूटा हुआ है. मुझे घर बनवाना है. मैंने सोचा था कि घर का पुनर्निर्माण कराऊँगा, लेकिन अब तो मैं नया घर बनाऊँगा."
उन्होंने कहा कि वे अपने सभी भाइयों की मदद करेंगे. सुशील कुमार ने कहा कि उन्हें पढ़ने-लिखने का बहुत शौक है और पैसे की कमी के कारण ऐसा नहीं कर पाते थे.
सुशील कुमार ने कहा कि अब वे ख़ूब पढ़ाई करेंगे. उन्होंने कहा कि इसकी उन्होंने ख़ास तैयारी नहीं की थी. सुशील कुमार ने कहा कि इसमें वैसे ही सवाल पूछे जाते हैं, जो सामान्य प्रतियोगी परीक्षाओं में पूछे जाते हैं.
बम फ़ोड़ने की ज़िम्मेदारी-सुशील के हर सही उत्तर पर तेज़ आवाज़ वाले बम फ़ोड़ने की ज़िम्मेदारी भाई सुधीर ने अपने कंधों पर ले रखी थी. साथ में रखे लाऊडस्पीकर कार्यक्रम की आवाज़ दूर-दूर तक पहुँचा रहे थे.
पिता अमरनाथ प्रसाद पर्दे के ठीक बगल में एक कुर्सी पर बैठे थे. जैसे ही सुशील फ़ास्टेस्ट फ़िंगर फ़र्स्ट जीतकर अभिताभ बच्चन के सामने बैठे, हर जगह सीटियाँ बजनी शुरू हो गईं.
प्रेरणा- मोतीहारी में लोगों की ज़ुबान पर सुशील का नाम है. लोगों का कहना है कि सुशील की वजह से लोगों को उनसे बहुत प्रेरणा मिली है.
स्थानीय निवासी कृष्ण कुमार कहते हैं कि सुशील की वजह से पढ़ाई कर रहे बच्चों में एक नई उमंग जागृत हुई है, कि अगर पढ़ाई के बल पर सुशील ये सब हासिल कर सकता है तो मैं क्यों नहीं.
कौन बनेगा करोड़पति के पाँचवें संस्करण की सर्वोच्च पुरस्कार राशि जीतने के बाद शो के एंकर अमिताभ बच्चन ने उन्हें मीडिया के सामने पेश किया.
अमिताभ बच्चन ने उनकी जमकर सराहना की है और कहा कि सुशील कुमार बहुत अच्छा खेले.
अमिताभ बच्चन ने कहा, "सुशील कुमार एक छोटे से गाँव से हैं. ये चंपारण, बिहार से हैं. ये वहाँ एक शिक्षक और कंप्यूटर ऑपरेटर भी हैं. इनके पास टीवी भी नहीं है. ये किसी और के यहाँ जाकर कौन बनेगा करोड़पति देखते थे."
उन्होंने सुशील कुमार के दृढ़ निश्चय की तारीफ़ की और कहा कि आम आदमी जो ठान लेता है, वो करके दिखाता है और सुशील कुमार इसका जीता-जागता नमूना हैं.
इस मौक़े पर सुशील कुमार की ख़ुशी छिपाए नहीं छिप रही थी. उन्होंने कहा कि उन्होंने सोचा नहीं था कि वे पाँच करोड़ जीत जाएँगे.
सुशील कुमार ने कहा, "मेरा घर टूटा हुआ है. मुझे घर बनवाना है. मैंने सोचा था कि घर का पुनर्निर्माण कराऊँगा, लेकिन अब तो मैं नया घर बनाऊँगा."
उन्होंने कहा कि वे अपने सभी भाइयों की मदद करेंगे. सुशील कुमार ने कहा कि उन्हें पढ़ने-लिखने का बहुत शौक है और पैसे की कमी के कारण ऐसा नहीं कर पाते थे.
सुशील कुमार ने कहा कि अब वे ख़ूब पढ़ाई करेंगे. उन्होंने कहा कि इसकी उन्होंने ख़ास तैयारी नहीं की थी. सुशील कुमार ने कहा कि इसमें वैसे ही सवाल पूछे जाते हैं, जो सामान्य प्रतियोगी परीक्षाओं में पूछे जाते हैं.
बम फ़ोड़ने की ज़िम्मेदारी-सुशील के हर सही उत्तर पर तेज़ आवाज़ वाले बम फ़ोड़ने की ज़िम्मेदारी भाई सुधीर ने अपने कंधों पर ले रखी थी. साथ में रखे लाऊडस्पीकर कार्यक्रम की आवाज़ दूर-दूर तक पहुँचा रहे थे.
पिता अमरनाथ प्रसाद पर्दे के ठीक बगल में एक कुर्सी पर बैठे थे. जैसे ही सुशील फ़ास्टेस्ट फ़िंगर फ़र्स्ट जीतकर अभिताभ बच्चन के सामने बैठे, हर जगह सीटियाँ बजनी शुरू हो गईं.
प्रेरणा- मोतीहारी में लोगों की ज़ुबान पर सुशील का नाम है. लोगों का कहना है कि सुशील की वजह से लोगों को उनसे बहुत प्रेरणा मिली है.
स्थानीय निवासी कृष्ण कुमार कहते हैं कि सुशील की वजह से पढ़ाई कर रहे बच्चों में एक नई उमंग जागृत हुई है, कि अगर पढ़ाई के बल पर सुशील ये सब हासिल कर सकता है तो मैं क्यों नहीं.
Monday, September 19
HEART TOUCHING LINES
Most Touching Lines by a boy whoz beloved was marrying sum1 else...
"Aaj dulhan ke laal jode me use uski saheliyon ne sajaya hoga,,,
meri jaan ke gore haathon ko mehandi se sajaya hoga...
bahut gehra chadha hoga mehndi ka rang,,,
...us mehndi me usne mera naam chhupaya hoga....
rah rah ke ro padi hogi,,,jb usko mera khayal aaya hoga....
khud ko dekha hoga jab aaine me to chehra mera bhi nazar aaya hoga...
bahut pyaari lag rahi hogi wo,,..aaj..
dekh kr usko chand bhi sharmaya hoga...
aaj meri jaan ne apne maa baap ki izzat ko bachaya hoga...
usne beti hone ka har farz nibhaya hoga. . . .
sochta hu kis tarah usne khud ko samjhaya hoga...
apne hathon se hamare khaton ko jalaya hoga...
khud ko mazbut banaakar meri yado ko mitaya hoga...
bhukhi hogi wo jaanta hu main,,mere bina usne kuch na khaya hoga..
aaj usne sab kuch peechay chhor ke kisi anjaan ko ,
apni zindagi ka humsafar banaya hoga.....
"Aaj dulhan ke laal jode me use uski saheliyon ne sajaya hoga,,,
meri jaan ke gore haathon ko mehandi se sajaya hoga...
bahut gehra chadha hoga mehndi ka rang,,,
...us mehndi me usne mera naam chhupaya hoga....
rah rah ke ro padi hogi,,,jb usko mera khayal aaya hoga....
khud ko dekha hoga jab aaine me to chehra mera bhi nazar aaya hoga...
bahut pyaari lag rahi hogi wo,,..aaj..
dekh kr usko chand bhi sharmaya hoga...
aaj meri jaan ne apne maa baap ki izzat ko bachaya hoga...
usne beti hone ka har farz nibhaya hoga. . . .
sochta hu kis tarah usne khud ko samjhaya hoga...
apne hathon se hamare khaton ko jalaya hoga...
khud ko mazbut banaakar meri yado ko mitaya hoga...
bhukhi hogi wo jaanta hu main,,mere bina usne kuch na khaya hoga..
aaj usne sab kuch peechay chhor ke kisi anjaan ko ,
apni zindagi ka humsafar banaya hoga.....
Thursday, September 15
करिश्माई व्यक्तित्व वाले जॉब्स
जब स्टीव जॉब्स ने अपनी कॉलेज की पढ़ाई बीच में छोड़ी थी तो शायद ही किसी को कोई फर्क पड़ा हो लेकिन अब जब उन्होंने एप्पल के सीईओ पद को छोड़ा है तो सारी दुनिया हिल गई है और बाजार में भूकंप सा आ गया है।
केवल एक सेमेस्टर के बाद पढ़ाई छोड़ देने वाले स्टीव को प्रतिभा का धनी छात्र माना जाता था। स्टीव ७० के दशक में पढ़ाई करने के बजाय अध्यात्म की तलाश में भारत आ गए और जब वे अमेरिका वापस लौटे तो बौद्ध बन चुके थे हालांकि उनके पिता एक सीरियाई मुसलमान थे।
लगभग चार साल के कम समय में ही आईपैड और आईफोन से दुनिया में छा जाने वाले एप्पल का दिल, दिमाग और आत्मा जॉब्स को ही माना जाता है। दुनिया के दूसरे सीईओ की तरह टाई और कोर्ट के बजाय वे पूरी बांह की काली टी शर्ट और जींस पहनना पसंद करते हैं। जॉब्स ने १९७६ में अपने कुछ दोस्तों के साथ मिलकर एप्पल कम्प्यूटर को शुरू किया था।
अथक मेहनत से कंपनी तो जम गई लेकिन हालात कुछ ऐसे बने कि जॉब्स का कंपनी के साथ बने रहना मुश्किल हो गया और अंतत: १९८५ में उन्हें एप्पल कम्प्यूटर को छोड़ देना पड़ा। लेकिन उनका जाना कंपनी के लिए नुकसान दायक सिद्ध हुआ और जितनी तरक्की कंपनी ने उनके नेतृत्व में की जॉब्स के बाद वह तरक्की थमने लगी।
इसी बीच माइक्रोसॉफ्ट को टक्कर देने के लिए एप्पल को जॉब्स की जरूरत महसूस हुई और उन्हें १२ साल बाद एक बार फिर से १९९७ में एप्पल में वापस बुला लिया गया। उनके नेतृत्व में कंपनी ने एक बार फिर रफ्तार पकड़ी और बाजार में मैकबुक और मैक पीसी नाम के उत्पाद उतारे। इन उत्पादों के बाद कंपनी की प्रसिद्धि और बाजार दोनों में ही काफी इजाफा हुआ।
अपनी दूसरी पारी की शुरू करने के १० बाद जॉब्स को उस समय भारी सफलता मिली जब एप्पल ने आईफोन का निर्माण कर दिया। इसके बाद तो जॉब्स और कंपनी के रूतबे में अचानक से ही बहुत बढ़ोतरी हुई। कुछ लोगों ने तो आईफोन के निर्माण को तकनीकी क्रांति की संज्ञा दे दी और यह बात कुछ हद तक सही भी थी क्योंकि केवल बात और मैसेज तक सीमित रहने वाला मोबाइल फोन एक चलता-फिरता कम्प्यूटर जो बन गया था
लेकिन तकनीकी क्षेत्र का यह व्यक्ति अपने स्वास्थ्य से हार गया। लीवर और कैंसर से ग्रसित होने के बाद जॉब्स ने कंपनी के सीईओ पद से इस्तीफा दे दिया। जॉब्स अपने कार्यकाल के दौरान कंपनी से वेतन के रूप में केवल एक डॉलर की राशि लेते रहे हैं, हालांकि उनके समस्त खर्चे कंपनी ही उठाती रही है।
बीमारी का असर उनके व्यक्तित्व पर भी पड़ा और वे एक जिद्दी नेता बन गए जो हर हाल में अपने एजेंडे को पूरा करना चाहता है। इसे उनकी मेहनत का ही परिणाम कहा जा सकता है कि आज एप्पल दुनिया का सबसे ब्रांड बन गया है।
केवल एक सेमेस्टर के बाद पढ़ाई छोड़ देने वाले स्टीव को प्रतिभा का धनी छात्र माना जाता था। स्टीव ७० के दशक में पढ़ाई करने के बजाय अध्यात्म की तलाश में भारत आ गए और जब वे अमेरिका वापस लौटे तो बौद्ध बन चुके थे हालांकि उनके पिता एक सीरियाई मुसलमान थे।
लगभग चार साल के कम समय में ही आईपैड और आईफोन से दुनिया में छा जाने वाले एप्पल का दिल, दिमाग और आत्मा जॉब्स को ही माना जाता है। दुनिया के दूसरे सीईओ की तरह टाई और कोर्ट के बजाय वे पूरी बांह की काली टी शर्ट और जींस पहनना पसंद करते हैं। जॉब्स ने १९७६ में अपने कुछ दोस्तों के साथ मिलकर एप्पल कम्प्यूटर को शुरू किया था।
अथक मेहनत से कंपनी तो जम गई लेकिन हालात कुछ ऐसे बने कि जॉब्स का कंपनी के साथ बने रहना मुश्किल हो गया और अंतत: १९८५ में उन्हें एप्पल कम्प्यूटर को छोड़ देना पड़ा। लेकिन उनका जाना कंपनी के लिए नुकसान दायक सिद्ध हुआ और जितनी तरक्की कंपनी ने उनके नेतृत्व में की जॉब्स के बाद वह तरक्की थमने लगी।
इसी बीच माइक्रोसॉफ्ट को टक्कर देने के लिए एप्पल को जॉब्स की जरूरत महसूस हुई और उन्हें १२ साल बाद एक बार फिर से १९९७ में एप्पल में वापस बुला लिया गया। उनके नेतृत्व में कंपनी ने एक बार फिर रफ्तार पकड़ी और बाजार में मैकबुक और मैक पीसी नाम के उत्पाद उतारे। इन उत्पादों के बाद कंपनी की प्रसिद्धि और बाजार दोनों में ही काफी इजाफा हुआ।
अपनी दूसरी पारी की शुरू करने के १० बाद जॉब्स को उस समय भारी सफलता मिली जब एप्पल ने आईफोन का निर्माण कर दिया। इसके बाद तो जॉब्स और कंपनी के रूतबे में अचानक से ही बहुत बढ़ोतरी हुई। कुछ लोगों ने तो आईफोन के निर्माण को तकनीकी क्रांति की संज्ञा दे दी और यह बात कुछ हद तक सही भी थी क्योंकि केवल बात और मैसेज तक सीमित रहने वाला मोबाइल फोन एक चलता-फिरता कम्प्यूटर जो बन गया था
लेकिन तकनीकी क्षेत्र का यह व्यक्ति अपने स्वास्थ्य से हार गया। लीवर और कैंसर से ग्रसित होने के बाद जॉब्स ने कंपनी के सीईओ पद से इस्तीफा दे दिया। जॉब्स अपने कार्यकाल के दौरान कंपनी से वेतन के रूप में केवल एक डॉलर की राशि लेते रहे हैं, हालांकि उनके समस्त खर्चे कंपनी ही उठाती रही है।
बीमारी का असर उनके व्यक्तित्व पर भी पड़ा और वे एक जिद्दी नेता बन गए जो हर हाल में अपने एजेंडे को पूरा करना चाहता है। इसे उनकी मेहनत का ही परिणाम कहा जा सकता है कि आज एप्पल दुनिया का सबसे ब्रांड बन गया है।
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