Monday, May 2

अमरीकी सेना ने आखिर मार गिराया लादेन

दुनिया का सबसे खतरनाक आतंकी ओसामा बिन लादेन आखिरकार एक अमरीकी सैन्य कार्रवाई में मारा गया है। कार्रवाई के बाद अमरीकी सेना ने उसके शव को अपने कब्जे में ले लिया है।
ओसामा बिन लादेन के मारे जाने की पुष्टि खुद अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने मीडिया के सामने आकर की। इसके तुरंत बाद भारी संख्या में लोग व्हाइट हाउस पर जमा हो गए और और लोग स़डकों पर उतर आए। लादेन पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद से 90 किलोमीटर दूर एबटाबाद में एक दो मंजिला मकान में छिपा हुआ था। लादेन के वहां छिपे होने की पुख्ता जानकारी के बाद अमरीकी सेना ने बीती अर्ध रात्रि को इस कार्रवाई को अंजाम दिया।
स्थानीय लोगों के रात करीब एक बजे एक हेलिकॉप्टरकाफी नीचाई पर मंडराता हुआ आया और पहले दो धमाके सुने गए।
इसके बाद एक जबर्दस्त धमाका हुआ, जो पूरे एबटाबाद में सुना गया। इसके कुछ देर बाद ही करीब एक बजकर 20-25 मिनट के बीच हेलिकॉप्टर में धमाका हुआ और गिर गया। उसके कुछ देर बाद ही एक और हेलिकॉप्टर आया और कुछ धमाके सुने गए।


न्यूयार्क के वल्र्ड ट्रेड सेंटर और पेंटागन की इमारत पर हमले के बाद से ही लादेन अमेरिका के सर्वाधिक वांछित व्यक्तियों की सूची में शीर्ष पर था। 9/11 के हमले के मुख्य साजिशकर्ता लादेन ने हमले के बाद कहा था कि हमले का परिणाम उसकी उम्मीदों से अधिक रहा। वह एक दशक से अमेरिकी और उसके सहयोगी बलों की आंखों में धूल झोंक कर बचता रहा है, जबकि उसके सिर पर 2.50 करो़ड डॉलर का इनाम घोषित था। वाशिंगटन के एक रणनीतिक थिंक टैंक, स्ट्रैटफॉर ने कहा है कि लादेन अलकायदा का प्रतीक बन गया था, यद्यपि जिस तरह से उसने संगठन को संचालित किया वह संदिग्ध है। स्ट्रेटफॉर ने कहा है, ""उसके मौत का प्रतीकात्मक महत्व स्पष्ट है। अमेरिका इसे एक ब़डी जीत बता सकता है।
एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि ओबामा प्रशासन ने लादेन के बारे में जुटाई गई जानकारी पाकिस्तान समेत किसी देश से शेयर नहीं की थी। अमरीकी सरकार के कुछ लोग ही इस ऑपरेशन के बारे में जानते थे। हमले में कोई भी अमरीकी सैनिक हताहत नहीं हुआ। अमरीकी सैनिक लादेन का शव अफगानिस्तान स्थित अपने एयरबेस मे ले गए। वहां उसका डीएनए टेस्ट कराया गया, जिसमें उसके लादेन होने की पुष्टि हो गई।

Saturday, April 9

'सचिन 200 प्रतिशत भारत रत्न के हक़दार' - धोनी


भारत को विश्व कप दिलाने वाली क्रिकेट टीम के कप्तान महेंद्र सिंह धोनी सचिन तेंदुलकर को भारत रत्न दिए जाने के दो सौ प्रतिशत पक्ष में हैं.

सचिन को ये सम्मान देने की माँग काफ़ी पहले से होती रही है मगर विश्व कप जीतने के बाद से ये और ज़ोर पकड़ रही है. इससे अभी एक ही दिन पहले महाराष्ट्र विधानसभा की ओर से भी इस बारे में एक प्रस्ताव पारित किया गया है.

इंडियन प्रीमियर लीग के चौथे संस्करण में हिस्सा लेने चेन्नई पहुँचे धोनी ने कहा, "सचिन भारत रत्न के लिए 200 प्रतिशत सबसे आदर्श प्रत्याशी हैं. उन्होंने 21 वर्षों तक देश की सेवा की है और अभी आने वाले कुछ और वर्षों तक करेंगे."

उन्होंने कहा, "बतौर क्रिकेटर अगर सचिन को भारत रत्न नहीं मिलता तो मुझे नहीं लगता कि कभी भी किसी क्रिकेटर को ये सम्मान मिलेगा. उन्होंने क्रिकेट को एग नए स्तर तक पहुँचाया है और जहाँ लोग क्रिकेट के बारे में ज़्यादा नहीं जानते वहाँ भी सचिन को वो जानते हैं."

इससे पहले सचिन ने धोनी को सर्वश्रेष्ठ कप्तान बताया था जिसके साथ उन्होंने क्रिकेट खेला है. इस बारे में पूछे जाने पर धोनी ने कहा, "मेरे लिए ये बहुत ही ख़ुशी की बात है कि सचिन ने मेरे बारे में ये बात कही है."

उन्होंने कहा, "सचिन की ही तरह मैं भी देश की सेवा कर रहा हूँ. मुझे जो भी काम दिया गया है मैंने उसे पूरी ईमानदारी से करने की कोशिश की है. मुझे ख़ुशी है कि सचिन को मेरे साथ खेलकर अच्छा लगा है."

14 साल की उम्र में आईआईटी


चौदह साल की उम्र में बच्चे अक्सर ये नहीं जानते कि उन्हे ज़िंदगी में आगे क्या करना है,पर दिल्ली के सहल कौशिक को इस उम्र मे न सिर्फ पता है कि उन्हें ज़िंदगी में आगे क्या करना है बल्कि उहोंने इस ओर अपने कदम भी बढ़ा दिए है.

सहल कौशिक ने 12वीं कक्षा के बाद देश की सबसे मुश्किल प्रतियोगिताओं में से एक माने जाने वाली आईआईटी परीक्षा में 33वां स्थान हासिल किया है और दिल्ली क्षेत्र में वे पहले स्थान पर रहे है. चौदह साल की उम्र में वे देश के सबसे छोटे आईआईटीयन बन गए हैं.

सहल एशियन ओलंपियाड में भी भारत की नुमाइंदगी कर चुके है. इससे पहले सहल कौशिक को कम उम्र की वजह से 10वीं की परीक्षा देने के लिए भी दिल्ली उच्च न्यायालय से विशेष अनुमति लेनी पड़ी थी.

सहल की माँ रुचि कौशिक से हमने पूछा कि उन्होने सहल के स्कूल में क्या नहीं पढाया, तो रुचि कौशिक कहती है. "सहल बचपन से ही काफी तेज़ था. हमने सोचा कि चलो घर पर पढ़ा कर देखते है, क्योकि अगर वो स्कूल जाएगा तो वो उसे वही पढ़ाएँगे जो वो पहले से ही जानता है."

सहल बचपन से ही प्रतिभा के धनी है. जब वे सिर्फ छह साल के थे तभी से सहल उपन्यास पढ़ने लगे थे.

सहल को पढ़ने के अलावा गाने सुनना और उपन्यास पढ़ना पसंद है.

सहल से जब हमने पूछा कि आईआईटी परीक्षा मे सफलता के लिए वो क्या गुर देंगे. सहल कहते है "अपने कॉन्सेप्ट पर पकड़ रखें. पिछले साल के पेपर की मदद से अभ्यास करें और पाठयक्रम की किताबे जरुर पढ़ें."

सहल अपनी सफलता का श्रेय अपनी माँ और नारायना ऐकेडमी मे फिजिक्स के अध्यापक उदय प्रताप सिंह को देते है.

लेकिन भविष्य में क्या करना चाहतें है इस मामले में भी सहल की सोच ज़रा अलग है. उन्होंने आईआईटी में 33वां स्थान हासिल किया है लेकिन वे दिल से इंजिनियरिगं के बजाए फिजिक्स मे बीएससी करना चाहते है ताकि एस्ट्रो- फिजिक्स में अनुसंधान कर सकें.

उसकी कामयाबी एक मिसाल है

कानपुर स्थित यशोदानगर की गंगा विहार कालोनी ग़रीबों की बस्ती है. इसी बस्ती में रहते हैं मोची राजेन्द्र प्रसाद जिनके अठारह साल के बेटे अभिषेक भारती ने आईआईटी इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा में सफल होकर एक मिसाल क़ायम की है.

उन्होंने अनुसूचित जाति श्रेणी में 154 वां स्थान हासिल किया है.

घर के नाम पर दस गुना दस फुट का एक कमरा है. इसी एक कमरे में राजेंद्र प्रसाद, पत्नी संगीता और उनके चार बेटे रहते हैं.

कमरे के बीच में एक दरवाजा है, जो एक छोटे से आँगन में खुलता है. एक रस्सी पर कपड़े टंगे हैं. दरवाजे से दाहिनी तरफ एक तख्त है, जिसमें वे सब अखबार बिखरे हैं, जिनमें अभिषेक की कामयाबी की खबर मोटे-मोटे अक्षरों में छपी हैं.

बगल के घर में बिजली है, मगर अभिषेक के माँ-बाप के पास इतना पैसा नहीं कि कनेक्शन ले सकें, इसलिए अभिषेक और उसके तीनों भाई लालटेन की रोशनी में ही पढ़ाई करते हैं.

अभिषेक कहते हैं, “शुरुआत में तो मुझे नहीं पता था कि यह आईआईटी क्या होता है, मगर इंटर फर्स्ट ईयर में मेरे एक सर संदीप गोयल ने कहा कि आईआईटी भारत का एक टॉप का इम्तिहान होता है, तब मेरे मन में भी लगन लगी कि मुझे यह इम्तिहान पास करना है.”

अभिषेक कहते हैं, “मैं रोज लगभग सात-आठ घंटे पढ़ाई करता था. लेकिन मैंने कोई शेड्यूल नहीं बनाया कि इतने घंटे फिजिक्स, केमिस्ट्री या मैथ ही पढ़ना है, क्योंकि कोई बाध्यता होने से पढ़ाई में मज़ा नहीं आता. और मज़े के बिना आईआईटी नहीं निकलती.”

अभिषेक अपनी इस सफलता में भाभा कोचिंग को श्रेय देना नहीं भूलते, जिसने उन्हें मुफ्त में पढ़ाया.

अभिषेक के गणित के टीचर संदीप गोयल ने बताया कि उसके अंदर किसी विषय को समझने और सवालों को अपने ढंग से हल करने की विशेष क्षमता है.

राजेन्द्र प्रसाद के मुताबिक मैंने बेटे को बस यही समझाया था, "देखो! तुम्हें यह बूट पालिश का काम नहीं करना है."

अभिषेक आगे चलकर अंतरिक्ष विज्ञान पढ़ना चाहता है और पूर्व राष्ट्रपति अब्दुल कलाम उसके आदर्श हैं. मगर अभिषेक की दिलचस्पी राजनीति में बिलकुल नहीं है, क्योंकि उसके मुताबिक उत्तर प्रदेश की राजनीति में काफ़ी ज़्यादा भ्रष्टाचार है.

Monday, April 4

संन्‍यास की बात तक नहीं करना चाहते सचिन तेंदुलकर


सचिन तेंदुलकर के करोड़ों प्रशंसक जो इस बात की चिंता कर रहे हैं, कि विश्‍व कप जीतने के बाद अब मास्‍टर ब्‍लास्‍टर क्रिकेट छोड़ देंगे, तो वे चिंता छोड़ दें। क्‍योंकि फिलहाल सचिन संन्‍यास की बात तक नहीं करना चाहते हैं। सोमवार को प्रेस वार्ता के दौरान जब मीडिया ने उनसे रिटायरमेंट पर सवाल पूछा तो सचिन ने कहा, "अभी संन्‍यास की बात नहीं करना चाहता। मैं फिलहाल अपनी जीत के इस लम्‍हे को पूरी तरह एन्‍ज्‍वॉय करना चाहता हूं।"

सचिन ने आगे कहा कि विश्‍वकप से पहले भी वे अपने खेल को पूरी तरह एंज्‍वॉय करते रहे हैं और अब भी करते रहेंगे। सचिन ने कहा, "मैं फिलहाल संन्‍यास के बारे में सोच नहीं रहा हूं। मैं अपने खेल को भरपूर एंज्‍वॉय करना चाहता हूं और जब तक हो सकेगा वो क्रिकेट खेलना जारी रखेंगे।"
इससे पहले जब सचिन अपने घर पहुंचे तो मोहल्‍ले व घर पर उनका घर पर भव्‍य स्‍वागत हुआ। उनकी पत्‍नी व मां ने उनकी आरती उतारी। उसके बाद सचिन सीधे पूजा घर में गये और गणपति भगवान के सामने मत्‍था टेका। इस दौरान बधाईयां देने के लिए मोहल्‍ले वालों का तांता लगा हुआ था।